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अपने जीवन में इस कार्य को करने से बचें, वरना हो सकता है अनर्थ

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Aug 12 2017 8:50AM IST
अपने जीवन में इस कार्य को करने से बचें, वरना हो सकता है अनर्थ

धनवान घर के प्राणी अधिक संस्कारवान हों, उसकी कोई गारंटी नहीं है क्योंकि निम्न घर में जन्म लेकर भी अनेक भव-प्राणियों ने तीर्थंकर गोत्र को प्राप्त किया है। इसलिए धर्म ही शाश्वत है।

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धर्म की शरण कभी नहीं छोड़ना चाहिए। शास्त्रों में कहा गया है कि संसार में मतलब की दोस्ती है। गलत कार्य में साथ देने वाले तो खूब मिल जाएंगे, लेकिन सही मार्ग पर चलाने वाले दोस्त विरले ही मिलते हैं।

धर्म का मार्ग कठिन जरूर है, क्योंकि इस मार्ग पर चलने वाले प्राणी को मान, माया, मोह जैसी बुराइयों का त्याग करना पड़ता है, लेकिन जो सौभाग्यशाली प्राणी इस मार्ग पर आगे बढ़ जाता है उसका जीवन सोने जैसा बन जाता है।

इसलिए खुद भी प्रवचन में जाएं तथा अपने दोस्तों को भी धर्म स्थल में लाने का प्रयास करें, ताकि धर्म का ज्यादा से ज्यादा विस्तार हो सके। प्रवचन के दौरान सुनी गई बातों का थोड़ा अंश भी प्राणी के अंदर रह जाए तो उसकी कायापलट हो सकती है।

माता-पिता का कर्तव्य है कि वे अपनी संतान को धर्म मार्ग पर चलाएं। साधु संतों के दर्शन करने आते समय बच्चों को साथ लेकर आएं, ताकि वे धर्म की राह पकड़ सकें।

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वर्तमान में काफी घरों के बच्चे दु‌र्व्यसनों में लिप्त हो गये हैं। मां-बाप व कुल की इज्जत से उन्हें कोई सरोकार नहीं है। ऐसे बच्चों का जीवन भोगों में जाता है तथा नरक गति में चले जाते हैं।

उन्होंने कहा कि घर में बच्चों को अच्छे संस्कार दें, ताकि वे गलत मार्ग पर न चले। पैसा तो आनी-जानी चीज है। संस्कार हमेशा प्राणी के साथ रहते हैं।

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-Tags:#Hindu Shastra#Religion#Religious Story
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