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पुत्रदा एकादशी: संतान प्राप्ति के लिए ऐसे करें पूजा, व्रत में रखें इस बात का ध्यान

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Aug 3 2017 11:41AM IST
पुत्रदा एकादशी: संतान प्राप्ति के लिए ऐसे करें पूजा, व्रत में रखें इस बात का ध्यान

संतान प्राप्ति की इच्छा रखने वालों के लिए आज का दिन बहुत खास है ऐसा इसलिए क्योंकि आज श्रावण मास शुक्ल पक्ष की एकादशी है जिसे पुत्रदा एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन व्रत रखने से स्त्री और पुरुष दोनों को समान रूप से लाभ होता है।

 
इस दिन व्रत रखने से संतान सुख मिलता है। ऐसी मान्यता है कि भगवान विष्णु का ध्यान करने से आज हर मनोकामना पूरी होती है।
 

ये है एकादशी पुत्रदा व्रत कथा-
 
प्राचीन काल में महिजीत नाम का एक राजा था जिसकी कोई संतान न थी। राजा को इस बात का बहुत दुख था लेकिन मंत्रियों और दरबारियों से राजा का दुख नहीं देखा गया तो उन लोग राजा को लोमेश ऋषि के पास लेकर गए। मंत्रियों ने ऋषि से राजा के निःसंतान होने का कारण और उसका उपाय पूछा।
 
ऋषि ने बताया कि पूर्व जन्म में राजा को एकादशी के दिन भूखा-प्यासा रहने और राजा जब जंगल में भ्रमण कर रहे थे तो उन्हें जोर से प्यास लगी। पानी की तलाश में राजा सरावर पहुंचे तो एक ब्यायी गाय वहां पानी पीने पहुंची लेकिन राजा ने गाय को भगा दिया और स्वयं पानी पीने लगे। ऋषि ने कहा कि गाय को भगाने की वजह से राजा इस जन्म में नि:संतान रह गए।
 
 
इसपर मंत्रियों ने हाथ जोड़कर ऋषि से पूछा कि अब इसका क्या उपाय है तो उन्होंने बताया कि अगर आप लोग चाहते हैं कि राजा को संतान की प्राप्ति हो तो इसके लिए आप लोग श्रावण शुक्ल एकादशी व्रत रखें और द्वादशी के दिन अपना व्रत राजा को दान कर दें। इसके बाद मंत्रियों ने वैसा ही किया और द्वादशी के दिन अपना व्रत राजा को दान कर दिया। इसके बाद राजा को एक सुंदर सी संतान हुई और तभी से इसका नाम पुत्रदा एकादशी पड़ा।

ऐसे करें पुत्रदा एकादशी का व्रत-
 
इस दिन सुबह नहाकर भगवान विष्णु को गंगाजल से स्नान कराएं और भोग लगाएं। पूरे दिन भगवान विष्णु का ध्यान करें और पूरे दिन कुछ न खाएं। अगर आप निराहार व्रत नहीं रह सकते तो आपको तला हुआ आहार, फल आदि लेना चाहिए। भगवान विष्णु की पूजा करें और जाप करें। व्रत के दूसरे दिन वेद पाठ करने वाले ब्राह्मणों को भोजन कराकर दक्षिणा दें। 
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