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इस तरह आपकी कुंडली में भी हो सकता है 'कालसर्प दोष'

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Jul 20 2017 12:23PM IST
इस तरह आपकी कुंडली में भी हो सकता है 'कालसर्प दोष'

महर्षि पाराशर और वाराह मिहिर के ज्योतिष शास्त्रों में भी काल सर्प दोष का वर्णन मिलता है। ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार मनुष्य के ग्रह नक्षत्र जब एक स्थान पर एकत्र हो जाते हैं तो संबंधित व्यक्ति काल सर्प दोष से पीड़ित बताया जाता है।

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इस दोष से पीडि़त व्यक्ति को नागपंचमी के दिन पूजा करने से लाभ होना बताया जाता है।

नागों की राजधानी भोगवतीपुर

शास्त्रों के अनुसार नागों की राजधानी भोगवतीपुर दर्शाया गया है। यह बस्तर अंचल का वर्तमान बारसूर है। बताया जाता है कि अर्जुन ने नाग जाति की राजकुमारी उलुपी से विवाह की, जो छत्तीसगढ़ अंचल की थी।
 

नागवंशीय परंपरा

अंचल में नागवंशों के राज के अनेक प्रमाण मिलते हैं। उन्होंने अंचल के अनेक स्थलों पर शिव मंदिरों का निर्माण कराया। इनके द्वारा निर्मित शिव मंदिर वास्तु और विभिन्न कलाओं से युक्त हैं। छत्तीसगढ़ में नागों के दो वंशों की राजधानी बस्तर और कवर्धा में रही। भोरमदेव का ऐतिहासिक शिव मंदिर नाग राजाओं द्वारा ही निर्मित है।
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-Tags:#Kalsarpe Dosh#Story About Of Snake#Religion News#Nag Nagin
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