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करवा चौथ की कहानी, जो करवा चौथ पर सुहागिनें पढ़ती हैं

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Oct 8 2017 11:06AM IST
करवा चौथ की कहानी, जो करवा चौथ पर सुहागिनें पढ़ती हैं

Karwa Chauth Ki Kahani 

करवा चौथ की कहानी का बहुत महत्व हैं।  व्रत के दौरान सुहागिनें कथा-कहानी भी करती हैं। पुराणों में हर व्रत या त्योहार से जुड़ी कहानियां होती हैं।

करवा चौथ पर विशेषतौर पर भगवान गणेश से जुड़ी कहानियां कही जाती हैं। इस व्रत में महिलाएं ज्यादातर यही कहानी सुनती और सुनाती हैं।

कहानी इस प्रकार है

एक नगर में एक साहूकार अपने सात लड़के और एक लड़की के साथ रहता था। साहूकार की महिलाओं ने कार्तिक महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी पर अपने पति के लिए करवा चौथ का व्रत रखा। भाभियों को देखकर साहूकार की बेटी ने भी अपने पति के लिए व्रत रख लिया।

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रात्रि भोज में जब सभी भाई खाने के लिए बैठे तो उन्होंने अपनी बहन को भी आवाज लगाई। व्रत के कारण भूख-प्यास से व्याकुल उनकी बहन ने खाना खाने से मना कर दिया और कहा कि आज मेरा व्रत है मैं चांद देखकर ही खाना खाऊंगी।

भूख-प्यास से व्याकुल बहन की हालत भाइयों से देखी न गई तो उन्होंने घर के बाहर जाकर आग जलाते हुए बहन से कहा कि देखो बहन चांद निकल आया है तुम पूजा संपन्न करके खाना खा लो। दूसरी तरफ उसकी भाभियां इस पूरे कृत्य के बारे में जानती थीं। उन्होंने अपनी ननद को समझाने की कोशिश की लेकिन वह नहीं मानी और पूजा-पाठ करके खाना खा लिया। उसके व्रत टूटने से नाराज भगवान गणेश नाराज हो गए।

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इसके बाद ही उसका पति बीमार हो गया और उसमें घर की सारी जमा पूंजी खर्च हो गई। साहूकार की बेटी को अंदेशा हुआ कि कहीं उसके गलत व्रत के कारण तो ऐसा नहीं हुआ। इसलिए उसने अपनी गलती का पश्चाताप करते हुए दुबारा व्रत रखा। फिर विधि-विधान से व्रत का पूजन कर भगवान गणेश की पूजा की। साहूकार की बेटी की श्रद्धा को देखते हुए भगवान गणेश ने उसके पति जीवन दान दे दिया और सारी जमा पूंजी भी वापस कर दी।

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