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कार्तिक पूर्णिमा: जानिए कार्तिक पूर्णिमा का महत्व और पूजा विधि

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Nov 1 2017 2:53PM IST
कार्तिक पूर्णिमा: जानिए कार्तिक पूर्णिमा का महत्व और पूजा विधि

कार्तिक मास पूरा व्रत और त्योहारों से भरा-पूरा रहता है। इस मास के शुक्लपक्ष एकादशी को भगवान विष्णु चार महीने शयन के बाद जगते हैं। जिसके बाद इनका विवाह विवाह तुलसी माता के साथ होता है। इसलिए इस दिन को तुलसी विवाह के नाम से भी जाना जाता है।

कार्तिक शुक्लपक्ष की पूर्णिमा का विशेष महत्व है क्योंकि इस दिन ही भगवान शिव ने राक्षस त्रिपुरासुर का वध किया था। इसके बाद से ही भगवान शिव त्रिपुरारी कहलाए थे। कथा के अनुसार राक्षस त्रिपुरासुर तीनों लोकों पर आतंक मचा रखा था।

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जब शिव ने इस असुर का वध किया तब सभी देवताओं दीप जलाकर खुशियां मनाई थी। इसलिए इस दिन को देव दिवाली के रूप में भी जाना जाता है। पुराणों के अनुसार इस दिन को ही भगवान विष्णु ने मतस्य अवतार लिया था। इस साल कार्तिक पूर्णिमा 4 नवंबर (शनिवार) को पड़ रहा है।

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कैसे करें कार्तिक पूजा

शास्त्रों में इस दिन गंगा स्नान करना उत्तम माना गया है। इस दिन सुबह जल्दी उठकर किसी नदी में स्नान करना सर्वोत्तम माना गया है। यदि ऐसा संभव नहीं हो तो पानी में गंगाजल डालकर भी स्नान कर सकते हैं। इसके बाद धूप-दीप से पूजा अर्चना करनी चाहिए। इस दिन दान करना भी विशेष महत्व रखता है। इस दिन किए गए दान का लाभ कई गुना बढ़ जाता है।

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