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कालाष्टमी: भैरव पूजा में भूलकर भी न करें ये गलतियां

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Nov 10 2017 2:13PM IST
कालाष्टमी: भैरव पूजा में भूलकर भी न करें ये गलतियां

भैरव को रात्रि के देवता के रूप में माना गया है। तंत्र विद्या में भैरव पूजन का विशेष महत्व है। इनके काल भैरव स्वरूप की पूजा से भूत-प्रेत की बाधा या तांत्रिक क्रियाओं की परेशानियों से मुक्ति मिलती है।

इस दिन काल भैरव की उपासना से जीवन के सभी विवाद, परेशानियां स्वतः खत्म हो जाती है। तंत्र उपासकों का मानना है कि इस तिथी पर काल भैरव की उपासना से जीवन की तमाम उलझनों का सरलता से समाधान निकल जाता है। 

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ऐसे करें काल भैरव की पूजा

शाम के समय भैरव की पूजा करें। साथ ही मध्य रात्रि के बाद काल भैरव की पूजा श्रेष्ठ मानी जाती है।

भैरव के समक्ष के बड़े पत्र में सरसों के तेल का दीपक जलाएं।

उड़द या दूध से बने पकवानों का भोग लगाएं।

तामसिक पूजा के लिए भैरव को मदिरा भी अर्पित की जाती है।

प्रसाद अर्पित करने के बाद भैरव के मंत्रों का जाप करना श्रेष्ठ माना गया है।

काल भैरव पूजन की सावधानियां 

काल भैरव पूजन में गृहस्थ जीवन जीने वालों को तामसिक पूजा नहीं करनी चाहिए।

भीरव के सौम्य स्वरूप बटुक भैरव की पूजा ही करनी चाहिए।

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काल भैरव की पूजा कभी भी दूसरों के नाश के लिए नहीं करनी चाहिए।

काल भैरव की पूजा योग्य गुरु के संरक्षण में ही करना चाहिए।

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