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ऐसे स्नान करने वालों को माना जाता है राक्षस, जानिए क्यों

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Sep 1 2017 2:54AM IST
ऐसे स्नान करने वालों को माना जाता है राक्षस, जानिए क्यों

हिंदू धर्म में स्नान करने का भी एक बहूत बड़ा महत्व है। साल में सिर्फ कुछ ही ऐसे दिन आते हैं जब लोग अपनी मोक्ष की कामना को लेकर पवित्र नदियों में स्नान करते हैं। 

सभी लोग जानते हैं कि शरीर की स्वच्छता के लिए रोज स्नान करना चाहिए। लेकिन किस समय स्नान करना चाहिए वह भी काफी अहम है। 

हमारे धर्म ग्रंथों में इस बारे में स्पष्ट बताया गया है और सुबह के स्नान को चार उपनाम दिए हैं। ये नाम हैं- मुनि स्नान, देव स्नान, मानव स्नान और राक्षस स्नान।

आपको बता दें कि मुनि स्नान सुबह 4 से 5 बजे के बीच किया जाता है। वहीं देव स्नान का समय सुबह 5 से 6 बजे के बीच का है। 

साथ ही 6 से 8 बजे के बीच मानव स्नान करते हैं। इसके बाद स्नान करने वाले लोगों को राक्षस कहा जाता है। 

धर्म ग्रंथों में मुनि स्नान को सर्वोत्तम बताया गया है। वहीं देव स्नान उत्तम है। मानव स्नान को सामान्य बताया गया है और राक्षसी स्नान को निषेध करार दिया गया है। 

कहा जाता है कि लोग जितनी जल्दी सुबह स्नान करेंगे, उससे उतना बड़ा फल भी मिलेगा। मुनि स्नान करने से घर में सुख-शांति ,समृद्धि, विद्या, बल, आरोग्य आता है। वहीं देव स्नान से जीवन में यश, कीर्ति, धन-वैभव, सुख, शान्ति, संतोष आता है। 

बता दें कि जो लोग मानव स्नान करते हैं, उन्हें काम में सफलता, भाग्य, अच्छे कर्मों की सूझ, परिवार में एकता मिलती है। जो लोग राक्षसी स्नान करते हैं कि उन्हें जीवन में दरिद्रता का सामना करना पड़ता है।

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-Tags:#Bath#Monster
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