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हरतालिका तीज: जानें इसका महत्व और कैसे महिलाओं को मिलेगा इसका फल

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Aug 24 2017 9:28AM IST
हरतालिका तीज: जानें इसका महत्व और कैसे महिलाओं को मिलेगा इसका फल

तीज पर्व 24 अगस्त को मनाया जा रहा है, इसके लिए अंचल में महिला अपनी तैयारी पूरी कर ली गई है। भगवान शिव की पूजा अर्चना कर अपनी पति की लंबी उम्र कर कामना करेंगी।

भाद्रपद के शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि के दिन तीजा पर्व मनाया जाता है। जिसे गौरी तृतीय व्रत भी कहा जाता है।

तीजा पर्व के पहले दिन माताएं करुभात की रस्म निभाती है और दूसरे दिन निर्जला उपवास रखती है और वे सोलह श्रृंगार कर भगवान शिव, पार्वती, गणेश की विधि विधान के साथ पूजा करती है।

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महिलाएं ने बताया कि माता पर्वती भगवान शिव को पति के रुप में चाहती थी इसके लिए उन्होने कठिन तपस्या की, 12 साल तक उन्होंने ने केवल पत्तों का सेवन किया तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने माता पर्वती को पत्नी के रुप में स्वीकार कर लिया। इसलिए तीज पर्व मनाया जाता है।

इस अवसर पर दूसरे दिन विसर्जन कर मीठा पकवान बनाकर पारंपरिक व्यंजन भी बनाया जाता है। पंडितों के अनुसार बताया कि तीज पर्व के दिन पूजा के लिए सुबह 05:45 से सुबह 08:18 बजे तक शुभ मुहूर्त माना जाएगा है और शाम 6:30 बजे से रात 08:27 बजे तक।

तीजा पर्व मायके में मनाया जाता है

छत्तीसगढ़ की पारंपरिक पर्व तीजा पर्व का विशेष महत्व है जो कि महिलाएं मायके में मनाती है। जो कि हर साल तीज पर्व का बेसब्री से इंतजार रहता है।

निर्जला व्रत रखकर पति की लंबी उम्र की कामना करती है। वही महिलाओें के साथ युवतियां भी तीज पर्व पर उपवास रहती है। वही मायके पक्ष से महिलाओं को लाने की परंपरा है।

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