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सूतक काल ने तोड़ी काशी में 26 साल पुरानी गंगा आरती की परंपरा

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Aug 7 2017 6:59PM IST
सूतक काल ने तोड़ी काशी में 26 साल पुरानी गंगा आरती की परंपरा
रक्षाबंधन के दिन यानी कि 7 अगस्त को सूतक लग जाने की वजह काशी के दशास्वमेध घाट पर 26 साल पुरानी परंपरा टूट गई है। बता दें कि काशी में गंगा सेवा निधि 26 साल से हर शाम गंगा आरती का आयोजन करवाती आई है। 
 
 
7 अगस्त सोमवार को दोपहर 12:40 बजे से सूतक लगा जो कि 01:20 पर खत्म हुआ। हिन्दू धर्म ग्रंथों में ऐसी मान्यता है कि ग्रहण से पहले मंदिरों के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं। 
 
सूतक और रात में गृह की वजह से दशाश्वमेध घाट पर आयोजकों ने पहली बार गंगा आरती दोपहर में संपन्न करवाई। इस मौके पर संस्था के पदाधिकारी सुशांत मिश्र, आशीष तिवारी, हनुमान यादव एवं सुरजीत कुमार सिंह वहां मौजूद रहे। 
 
 
सूतक की वजह से कांवड़िये भी सावन के आखिरी सोमवार को बाबा विश्वनाथ के दूर से ही दर्शन कर पाए। उल्लेखनीय है कि चंद्रग्रहण का सूतक लगने के साथ ही विश्वनाथ मंदिर के पट दोपहर 1:57 पर बंद कर दिया गया। 
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ganga aarti in kashi breaks 26 years old tradition

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