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धनतेरस: पूजन विधि और सामग्री

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Oct 17 2017 3:04PM IST
धनतेरस: पूजन विधि और सामग्री

धनतेरस के दिन धन के देवता कुबेर की पूजा की जाती है। साथ ही आयुर्वेद के आचार्य धन्वंतरी की पूजा सेहत के लिए की जाती है। इस डिम यमराज की भी पूजा की जाती है। पूरे साल में यह दिन ही एक ऐसा दिन है जब यमराज की पूजा की जाती है। यमराज की पूजा अकाल मृत्यु से बचने के लिए की जाती है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन विशेष विधि से पूजा करने से जीवनभर धन की कमी नहीं होती है।

पूजन सामग्री

कमल का बीज 21, मणि पत्थर 5 प्रकार के, सुपारी 5, लक्ष्मी–गणेश के सिक्के, अगरबत्ती, चूड़ी, तुलसी पत्र, पान, चंदन, लौंग, नारियल, सिक्के, काजल, दहीशरीफा, धूप, फूल, चावल, रोली, गंगा जल, माला, हल्दी, शहद और कपूर।

पूजन विधि

शाम के समय शुभ मुहूर्त में उत्तर दिशा की ओर कुबेर और धन्वंतरी की स्थापना करें। 
एक-एक मुख का घी का दीया दोनों देवता के सामने जलाएं।
कुबेर को सफेद मिठाई और धन्वंतरी देव को पीली मिठाई चढ़ाएं।
फिर "ॐ ह्रीं कुबेराय नमः" का जाप करें।
फिर "धन्वंतरी स्तोत्र" का पाठ करें।
धन्वंतरी देव की पूजा के बाद भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पंचोपचार पूजा करना अनिवार्य माना गया है।
भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की प्रतिमा के सामने मिट्टी के दीप जलाएं। फिर धूप-दीप जलाकर उनकी पूजा करें।
भगवान गणेश और माता लक्ष्मी के चरणों में फूल चढ़ाने के बाद मिठाई का भोग लगाएं। इस लगाए भोग को खुद और पूरे परिवार के बीच बाटें। पूजा के बाद कुबेर को धन स्थान पर और धन्वन्तरि को पूजा स्थान पर रखें।

यम का दीपक 

सबसे पहले यम के नाम का ही दीपक जलना चाहिए फिर घर में दीपक जलना चाहिए।
किसी लकड़ी के बेंच पर या जमीन पर तख्त रखकर रोली से स्वस्तिक बनाएं।
फिर मिट्टी के चौमुखी दीपक या आटे से बने चौमुखी दीप को उस पर रखें दें।
दीप के आसपास तीन बार गंगाजल का छिड़काव करें।
दीप पर अरवा चावल और तिलक लगाएं।
दीप पर थोड़े फूल चढ़ाएं।
इसके बाद 1 रुपये का सिक्का दीप में डालें।
परिवार के सदस्यों को तिलक लगाएं।
दीप को प्रणाम करें।
दीप को घर के बहार किसी ऊंचे जगह पर रखें। ध्यान रखना है कि यह दीपक घर के दाहिने तरफ हो। साथ ही यह भी ध्यान रखना चाहिए कि दीपक की लौ दक्षिण की तरफ हो। 
यह दीपक मृत्यु के देव यमराज के लिए जलाया जाता है इसलिए इस दीप को पूरी श्रद्धा के साथ प्रणाम करें। साथ ही यह भी प्रार्थना करें कि हे यम देवता आप मेरी और मेरे परिवार पर सदैव दया दृष्टि बनाए रखें और अकाल मृत्यु से बचाएं।
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