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देवउठनी एकादशी: 'तुलसी विवाह' पूजा करते हैं तो आज ही जान लें ये अहम बातें

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली Devuthani Ekadashi Tulsi Vivah 2017 | UPDATED Oct 30 2017 6:09PM IST
देवउठनी एकादशी: 'तुलसी विवाह' पूजा करते हैं तो आज ही जान लें ये अहम बातें

Devuthani Ekadashi Tulsi Vivah 2017

देवउठनी एकादशी को देवशयनी और प्रबोधनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस साल यह 31 अक्टूबर (मंगलवार) को मनाया जाएगा। पुराणों के अनुसार देवउठनी एकादशी को ही भगवान विष्णु का विवाह तुलसी के साथ हुआ था।

इसलिए इस दिन को लोग तुलसी विवाह के नाम से भी जानते हैं। इस दिन खास यह होता है कि भगवान विष्णु के जगने के बाद ही माता तुलसी का विवाह इनके साथ होता है। ऐसे में भगवान विष्णु और तुलसी माता के विवाह से संबंधित अहम बातों को जानना बेहद जरूरी हो जाता है।

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ये हैं अहम बातें 

विवाह के समय तुलसी के पौधे को आंगन, छत या जहां भी पूजा करना चाहते हैं उसके बिल्कुल बीच में रखें।
तुलसी का मंडप सजाने के लिए गन्ने का प्रयोग अच्छा माना गया है।
विवाह-विधि शुरू करने से पहले माता को चुनरी अवश्य चढ़ाना चाहिए।
अब गमले में सालिग्राम भगवान को रखें लेकिन उनपर अक्षत ना चढाएं। क्योंकि उन्हें तिल चढ़ाया जाता है।
माता तुलसी और सालिग्राम भगवान के ऊपर दूध में हल्दी मिलकर चढ़ाना चाहिए।
विवाह के समय बोला जाने वाला मंगलाष्टक अवश्य बोलना चाहिए।
माता तुलसी और भगवान विष्णु की विवाह के दौरान 11 बार तुलसी जी की परिक्रमा करनी चाहिए।
भोग लगाए हुए प्रसाद को भोजन के साथ ग्रहण करना चाहिए और बांटना भी चाहिए।
विवाह-पूजा खत्म होने के बाद घर के सभी सदस्य चारों तरफ से पटिए को उठा कर भगवान विष्णु से जागने की प्रार्थना करें और कहें-उठो देव सांवरा, भाजी, बोर आंवला, गन्ना की झोपड़ी में, शंकर जी की यात्रा।
ऐसा कहने का मतलब होता है- हे सांवले-सलोने देव, भाजी, बोर, आंवला चढ़ाने के साथ हम चाहते हैं कि आप जाग जाएं और इस संसार का कार्यभार संभालें। साथ ही शंकर जी को फिर से अपनी यात्रा की अनुमती दें। 
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dev uthani ekadashi tulsi vivah 2017

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