Top

देव दीपावली 2017: काशी के गंगा घाट पर दिखती है देवलोक की छवि, सदियों पुरानी है यह परंपरा

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Nov 2 2017 5:23AM IST
देव दीपावली 2017: काशी के गंगा घाट पर दिखती है देवलोक की छवि, सदियों पुरानी है यह परंपरा

देव दीपावली कार्तिक मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है। देव दीपावली के ठीक 15 दिन बाद मनाई जाती है। देश की सांस्कृतिक नगरी वाराणसी में इस पर्व का असल आनंद मिलता है। यह पर्व काशी की विशेष संस्कृति और परंपरा से जुड़ा है।

इस अवसर पर गंगा नदी के किनारे रविदास घाट से लेकर राजघाट तक लाखों दीए जलाकर माता गंगा की पूजा की जाती है। माता गंगा की इस पूजा का नजारा बेहद रमणीय होता है। कहा जाता है कि देव दीपावली की इस परंपरा की शुरुआत सबसे पहले साल 1915 में पंचगंगा घाट पर हजारों दीए जलाकर की गई थी। इस साल यह देव दीपावली 3 नवंबर (शनिवार) को मनाई जाएगी।

इसे भी पढ़े: कार्तिक पूर्णिमा: जानिए कार्तिक पूर्णिमा का महत्व और पूजा विधि

क्यों मानते हैं देव दीपावली 

शास्त्रों देव दीपावली के विषय में बहुत सारी कथाओं की चर्चा है। जिसमें एक कथा के अनुसार एक राक्षस था जिसका नाम त्रिपुरासुर था। वह देव लोक में अपने अत्यचार से सभी देवताओं को तबाह कर रखा था। देवताओं के कहने पर भगवान शिव ने त्रिपुरासुर का वध किया था। त्रिपुरासुर के वध के बाद देवताओं ने खुश होकर दिवाली मनाई जिसे बाद में देव दिवाली के रूप में मनाया जाने लगा।
 

ADS

(हमसे जुड़े रहने के लिए आप हमें फेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं )

ADS

ADS

मुख्य खबरें

ADS

ADS

ADS

ADS

Copyright @ 2017 Haribhoomi. All Right Reserved
Designed & Developed by 4C Plus Logo