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संतान की चाह में श्रद्धालुओँ ने लगाई लोलार्क कुंड में डुबकी

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Aug 27 2017 2:42PM IST
संतान की चाह में श्रद्धालुओँ ने लगाई लोलार्क कुंड में डुबकी

वाराणसी में भादो माह के शुक्ल पक्ष के छठें दिन लोलार्क षष्ठी पर संतति कामना से लगभग तीन लाख लोगों ने लोलार्क कुंड में डुबकी लगाई। संकल्पों के साथ पति-पत्नी ने एक साथ स्नान किया। 

भगवान सूर्य को समर्पित इस अनुष्ठान के जरिए उम्मीद की नई किरणों को जगाया जाता है और  पुराने वस्त्र आदि तक का त्याग किया जाता है। षष्ठी माता को पुष्प व शृंगार सामग्री अर्पित की जाती है।

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लोकमानस में संतति की मान्यता प्राप्त भथुआ, लौकी, कोहड़ा के साथ बेल, धतूरा या कदंब चढ़ा कर इसे आजीवन न खाने का संकल्प लिया जाता है।

विज्ञान और तकनीक के इस दौर में भी धार्मिक मान्यताओं की समृद्धि का प्रमाण ही है कि लोलार्क कुंड में स्नान के लिए शुक्रवार की शाम से ही कतार लग गई।

हालांकि षष्ठी तिथि तो रात आठ बजे ही लग गई लेकिन श्रद्धालुओं ने अंग्रेजी कैलेंडर का भी मान रखा और रात 12 बजे के बाद डुबकी लगाने का क्रम शुरू हो गया।

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रात के तीसरे प्रहर तक पांडेयहवेली और दूसरी ओर अस्सी तक कतार लग गई। स्नान-ध्यान और दर्शन-पूजन विधान का दौर सप्तमी लगने से पहले शाम लगभग 6 बजे तक चला।

इसमें तमाम ऐसे भी रहे जो मन्नतें पूरी होने पर बाजे-गाजे के साथ लोलार्क कुंड तक आए। लोलार्केश्वर महादेव मंदिर में मुंडन कराया, लाल को भी कुंड में स्नान कराया और सौगात के लिए आभार जताया। इसमें पूर्वांचल से लेकर पश्चिम बिहार तक के श्रद्धालु थे।   

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desire of children devotees plunge into the lolark pond

-Tags:#Varanasi#Lolark Kund#Lolarkeshwar Mahadev#Temple

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