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छठ पूजा 2017: 52 तालाबों के बीच है ये सूर्य मंदिर, छठ व्रत‌ियों की मनोकामना पूर्ण होगी ऐसे

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Oct 20 2017 6:32PM IST
छठ पूजा 2017: 52 तालाबों के बीच है ये सूर्य मंदिर, छठ व्रत‌ियों की मनोकामना पूर्ण होगी ऐसे

छठ सूर्य की उपासना का पर्व है। छठ पर्व कार्तिक मास की चतुर्थी से शुरू होकर सप्तमी तिथि तक मनाई जाती है। प्रथम दिन को नहाय-खाई के रूप में जाना जाता है। जिसमें छठ का व्रत रखने वाले लोग स्नान-ध्यान कर छठ पर्व की तैयारी शुरू करते हैं।

इस महापर्व का दूसरा दिन खरना होता है जिसमें व्रती प्रसाद स्वरुप गुड़ का खीर बनाकर घर-परिवार के लोगों को देतीं हैं। यहीं से 36 घंटे का निर्जला व्रत का सिलसिला शुरू होता है।जो क्रमशः सप्तमी तिथि तक चलता है। वैसे तो इस पर्व में सूर्य की उपासना के लिए लोग किसी नदी या तालाब के किनारे अस्त होते सूर्य और उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं। सूर्योपासना के इस महापर्व पर हम आपको देश के सूर्य मंदिरों के बारे में बताने जा रहे हैं।

कोणार्क सूर्य मंदिर (उड़ीसा)

उड़ीसा का कोणार्क सूर्य मंदिर दुनियां भर में लोग जानते हैं। यह मंदिर को रथ का स्वरुप देकर बनाया गया है। भगवान सूर्य का यह मंदिर प्राचीन वास्तु काला का प्रतीक है। इस मंदिर का निर्माण 13 वीं शताब्दी में राजा नरसिंह देव नें करवाया था।

विवस्वान सूर्य मंदिर 

यह सूर्य मंदिर मध्यप्रदेश के ग्वालियर में स्थित है। इस सूर्य मंदिर की भव्यता देखते ही बनती है। पूरब दिशा वाले इस मंदिर में सात घोड़ों पर सवार सूर्य का स्वरुप अद्भुत है। मंदिर का मुख पूरब दिशा की ओर होने से सूरज की पहली किरणें जब मंदिर में प्रवेश करती है तो मंदिर का सौंदर्य अनूठा दिखता है। 

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बेलार्क सूर्य मंदिर 

यह सूर्य मंदिर बिहार के भोजपुर जिले में स्थित है। इस सूर्य मंदिर का निर्माण राजा सूबा ने करवाया था। यह सूर्य मन्दिर 52 पोखरों के बीच में स्थित है। यहां छठ पर्व के दौरान लाखों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ते हैं। इस मंदिर के संबंध में ऐसा कहा जाता है कि जो भी सच्चे मन से छठ पूजा करता है उसके सारे रोग कष्ट दूर हो जाते हैं। साथ ही सभी मनोकामनाएं पूरी होती है।

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मोढ़ेरा सूर्य मंदिर

यह मंदिर गुजरात के मोढ़ेरा में स्थित है। अहमदाबाद शहर से लगभग 100 किलोमीटर पर अवस्थित है। इस मंदिर का निर्माण भीमसेन सोलंकी प्रथम ने करवाया था। इस मंदिर के गर्भगृह के अंदर की लंबाई 51 फुट 9 इंच और चौड़ाई 25 फुट 8 इंच है। इस मंदिर का निर्माण कुछ इस तरह किया गया था कि जिसमें सूर्योदय होने पर सूर्य की पहली किरण मंदिर के गर्भगृह को रोशन करे। सभामंडप के आगे एक विशाल कुंड स्थित है जिसे लोग सूर्यकुंड या रामकुंड के नाम से जानते हैं। 

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