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छठ 2017: छठी मईया पूरी करती हैं पुत्र की कामना, ये है व्रत कथा

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Oct 23 2017 4:50PM IST
छठ 2017: छठी मईया पूरी करती हैं पुत्र की कामना, ये है व्रत कथा

छठ महापर्व को मन्नतों और मुरादों का पर्व कहा गया है। छठ पर्व में मान्यता है कि इस पर्व में गलती की कोई जगह नहीं है। इसलिए इस पर्व में शुद्धता का बेहद खास खयाल रखा जाता है। छठ में डूबते और उगते दोनों समय सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। भगवान सूर्य की आराधना का इतिहास बहुत ही पुराना है।

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छठ पर्व की मान्यता के विषय में पुराणों में ऐसी कई कथाएं हैं जिसमें मां षष्ठी के साथ-साथ सूर्यदेव की पूजा की बात कही गई है। फिर चाहे वो त्रेतायुग में भगवान राम हों या फिर सूर्य के समान पुत्र कर्ण की माता कुंती। छठ पूजा को लेकर परंपरा में कई कहानियां प्रचलित हैं। छठ पर्व के पुरातन का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि त्रेता युग में भगवान राम नें भी सूर्य की आराधना की थी।

प्रियव्रत कथा 

एक अन्य मान्यता के अनुसार राजा प्रियव्रत और उनकी पत्नी में संतान प्राप्ति के लिए पुत्रयेष्टि यज्ञ किया था। लेकिन उनका संतान होते ही काल के गाल में समा गए। संतान वियोग में आकर प्रियव्रत आत्महत्या करने लगे तो उसी वक्त षष्ठी देवी ने प्रकट होकर उन्हें कहा कि तुम मेरी आराधना करो तुम्हें संतान की प्राप्ति होगी। जिसके बाद राजा प्रियव्रत ने षष्ठी देवी की आराधना की और उन्हें पुत्र की प्राप्ति हुई। इसके बाद से ही छठ का महापर्व मनाया जाने लगा और तब से अब तक इस पर्व को पूरी निष्ठा और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। 

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कुंती-कर्ण कथा

महाभारत में कथा आती है कि जब कुंती कुंवारी थीं तो उन्होंने महर्षि दुर्वासा के वरदान का सत्य जानने के लिए सूर्य का आवाहन किया। जिसके बाद कुंती ने सूर्य जैसी कांति वाले पुत्र की इच्छा जताई। सूर्य देव की कृपा से कुन्ती को कर्ण जैसा परकर्मी और शूरवीर पुत्र की प्राप्ति हुई।

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