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छठ 2017: नहाय-खाय विधि और सावधानियां

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Oct 23 2017 10:47AM IST
छठ 2017: नहाय-खाय विधि और सावधानियां

छठ महापर्व सूर्य की उपासना का पर्व है। छठ महापर्व की शुरुआत नहाय-खाय से होती है। छठ पर्व ही एक ऐसा पर्व है जिसका पूरा विधि-विधान निष्ठा से किया जाता है। छठ पर्व साल में दो बार मनाया जाता है। पहला चैत्र मास में और दूसरा कार्तिक मास में।

वैसे तो दोनें ही समय में छठ पर्व का अपना एक विशेष महत्व है लेकिन कार्तिक मास में मनाए जाने वाले छठ पर्व को लोग व्यापक स्तर पर मानते हैं। चार दिवसीय छठ महापर्व नहाय-खाय के साथ 24 अक्टूबर(मंगलवार) से हो रही है। ऐसे में हम आपको नहाय-खाय की विधि और सावधानियों के बारे में बता रहे हैं।

नहाय-खाय विध‍ि और विधान 

छठी मैया का यह महापर्व निष्ठा का पर्व है। इसलिए सबसे पहले घर अच्छी तरह साफ-सफाई करनी चाहिए। सुबह किसी नदी, तालाब, कुआं अथवा चापाकल के पानी से स्नान कर साफ वस्त्र पहनना चाहिए। इस दिन गंगा स्नान करना शुभ माना गया है। यदि गंगा स्नान करना संभव नहीं है तो गंगाजल को छिड़क सकते हैं।

इस दिन छठ व्रती महिला या पुरुष शुद्ध चने की दाल और लौकी की सब्जी को भोजन में सम्मिलित करते हैं। सब्जी में प्रयोग किये जाने वाले नमक सेंध नमक ही होता है।

व्रती इस दिन अरवा चावल से बने भात का ही सेवन करते हैं। सूर्य देव को भोग लगाने के बाद ही भोजन करने का विधान है।

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व्रती के साथ-साथ घर के सभी सदस्य भी यही भोजन करते हैं।

इस दिन घर के किसी भी सदस्य को मांस और मदिरा का सेवन बिलकुल नहीं करना चाहिए।

व्रती महिला या पुरुष को नहाय-खाय से लेकर छठ पर्व की समाप्ति तक जमीन या फर्श पर ही सोना उत्तम माना गया है।

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