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चाणक्य नीति: इन दो कारणों से व्यक्ति पल-पल सहता है अपमान

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Nov 29 2017 1:07PM IST
चाणक्य नीति: इन दो कारणों से व्यक्ति पल-पल सहता है अपमान

चाणक्य की जितनी भी नीतियां हैं वे मनुष्य के जीवन में बहुत बड़ी सीख देती है। इन नीतियों को यदि व्यक्ति आत्मसात कर लें तो कई परेशानियों से बच सकता है। चाणक्य नीति के अनुसार धन का नुकसान कोई नुकसान नहीं है। इसके अलावे रिश्ते और प्यार का नुकसान भी उतना दर्द नहीं देता है।

आचार्य चाणक्य के अनुसार व्यक्ति को सबसे अधिक कष्ट तब होता है जब उसका अपमान होता है। आचार्य चाणक्य के अनुसार हम आपको बता रहे हैं कि इन कारणों से व्यक्ति पल-पल अपमान सहता है। चाणक्य के अनुसार इन दो परिस्थितियों में व्यक्ति अपना अपमान पल भर में कर बैठता है। यदि व्यक्ति ऐसी परिस्थितियों को जीवन में आने न दे तो उसका स्वाभीमान सदा बरकरार रहेगा। 

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ज्ञान की कमी 

चाणक्य नीति के अनुसार जिस व्यक्ति के पास ज्ञान की कमी होती है उसे जीवन के हर मोड़ पर अपमानित होना पड़ता है। दुनियां उसे दरकिनार कर देती है। उसके हाथ से धीरे-धीरे सारे अवसर निकलते चले जाते हैं। इसलिए ज्ञान की प्राप्ति के लिए हर मनुष्य को मूर्खता का त्याग करना चाहिए।

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धन के लिए किसी अन्य पर निर्भरता 

जो व्यक्ति धन के लिए जीवन भर किसी दूसरे पर निर्भर होता है। उसका पल-पल तिरस्कार होता रहता है। जिस व्यक्ति पर वह निर्भर रहता है वह उसे तुच्छ मानने लगता है। इस कारण धन के लिए दूसरे पर निर्भर व्यक्ति इसका विरोध भी नहीं कर पाता है। वह केवल अपमान सहता रहता है।

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