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भाई दूज: पूजा विधि और तिलक मंत्र

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Oct 20 2017 4:11PM IST
भाई दूज: पूजा विधि और तिलक मंत्र

भाई दूज यानि भईया दूज कार्तिक मास के द्वितीय तिथि को मनाई जाती है। जिसे भईया दूज के अन्य नाम से भी जाना जाता है। भैया दूज के दिन बहने अपने भईयों के माथे पर तिलक लगाकर लंबे उम्र की कामना करती है। हिन्दू पंचांग के अनुसार इस साल भैया दूज 21 अक्टूबर को है। भैया दूज के इस पवन पर्व को कई स्थानों पर भाई फोटा भी कहा जाता है। 

पूजा विधि 

भाई दूज के दिन बहनें लकड़ी के आसन (पीढ़िया) अरवा चावल को पीसकर बनाए घोल से चौक बनाएं।
फिर रोली, चंदन, घी का दीपक, फूल और मिठाई से थाल सजाएं। 
कद्दू का पीला और ताजा फूल, पान का पत्ता, सुपारी चरखा का सूट इत्यादि को किसी पीतल का कटोरानुमा बर्तन में रखें। 
अब भाई को लकड़ी का आसन यानि पीढ़िया पर भाई को बैठने को कहें। 
फिर भाई के दोनों हाथ जैसे सुबह उठकर हाथ देखते हैं वैसा ही बनाने को कहें। 
अब हाथों के बीचों में पान, सुपारी, चारखा का सूत इत्यादि को रखें।   
भाई के दोनों हाथों के अंगूठे पर अरवा चावल के पीसे भोल को लगाएं।
पानी से भाई के हाथों को धोएं ऐसा क्रमशः तीन बार करें।
फिर भाई के माथे पर तिलक लगाकर लंबी उम्र की कामना करें।
भाई बहन को कोई उपहार दें। 

तिलक लगाते समय पढ़ें इस मंत्र को 

गंगा पूजे यमुना को, यमी पूजे यमराज को, सुभद्रा पूजे कृष्ण को, गंगा यमुना नीर बहे मेरे भाई आप बढ़ें, फूले-फलें

तिलक लगाने का मुहूर्त 

दोपहर 1 बजकर 19 मिनट से 3 बजकर 36 मिनट तक  
 
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