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पितृ पक्ष श्राद्ध में भूलकर भी ये काम

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Sep 6 2017 11:52AM IST
पितृ पक्ष श्राद्ध में भूलकर भी ये काम

श्राद्ध करने के लिए मनुस्मृति और ब्रह्मवैवर्त पुराण जैसे शास्त्रों में बताया गया है कि दिवंगत पितरों के परिवार में या तो सबसे बड़ा पुत्र या सबसे छोटा पुत्र और यदि पुत्र न हो तो धेवता (नाती), भतीजा, भांजा या शिष्य ही तिलांजलि और पिंडदान दे सकते हैं। 

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पितरों के निमित्त सारी क्रियाएं गले में दाये कंधे मे जनेउ डाल कर और दक्षिण की ओर मुख करके की जाती है। श्राद्ध का समय हमेशा जब सूर्य की छाया पैरो पर पड़ने लग जाए यानि दोपहर के बाद ही शास्त्र सम्मत है। सुबह-सुबह अथवा 12 बजे से पहले किया गया श्राद्ध पितरों तक नहीं पहुंचता है।

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श्राद्ध के नाम पर सुबह सुबह हलवा पूरी बनाकर और थाली बनाकर मन्दिर में पंडित को देने से श्राद्ध का कर्म पूरा नहीं होता है। ऐसे श्राद्ध करने वाले को उसके पितृगण कोसते हैं क्योंकि उस थाली को पंडित भी नहीं खाता है। 

 ये चीज भोजन में वर्जित है-

श्राद्ध के दिन लहसुन, प्याज रहित सात्विक भोजन ही घर की रसोई में बनना चाहिए। जिसमें उड़द की दाल, बडे, चावल, दूध, घी से बने पकवान, खीर, मौसमी सब्जी जैसे तोरई, लौकी, सीतफल, भिण्डी कच्चे केले की सब्जी ही भोजन में मान्य है। आलू, मूली, बैंगन, अरबी तथा जमीन के नीचे पैदा होने वाली सब्जियां पितरों को नहीं चढ़ती है। 

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-Tags:#Shrada 2017#Pitripaksha#Pindadan#Sarvapatri Amavasya#Mahalaya Amavasya
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