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ये है 'आरती' की सही विधि, अब तक आप कर रहे थे गलतियां

टीम डिजिटल/हरिभूमि, दिल्ली | UPDATED Nov 22 2017 5:52PM IST
ये है 'आरती' की सही विधि, अब तक आप कर रहे थे गलतियां

हिन्दू धर्म में पूजा के दौरान आरती का विशेष महत्व है। मान्यता है कि यदि पूजा के दौरान कोई गलती हो जाती है तो आरती करने से भगवान गलतियों को क्षमा कर देते हैं। लेकिन बहुत लोग आरती की विधिवत प्रक्रिया को नहीं जानते हैं। जिस कारण से जैसे-तैसे आरती का सामापन कर देते हैं। वस्तुतः पूजा की आत्मा आरती ही होती है। इसलिए पूजा के दौरान की जाने वाली आरती के विधिवत रूप को जानना आवश्यक हो जाता है।

शंख-बाती आरती 

आरती के दौरान शंख का वादन अवश्य होना चाहिए। साथ ही आरती में घंटी बजना भी शुभ माना जाता है। आरती में शंख और घंटी के वादन से समस्त नकारात्मक उर्जा खत्म होता है। इसके अलावे इनकी गूंज भगवान तक पहुंचती है। साथ ही आरती में दीपों या बातियों की संख्यां हमेशा एक, पांच और सात के क्रम में होना चाहिए। यदि आरती में कपूर का प्रयोग करते हैं तो उसमें भी यह नियम ही लागू करना चाहिए।

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शंख जल आरती

आरती का एक अहम हिस्सा शंख-जल आरती है। शंख जल आरती में आरती के दौरान शंख का जल आरती में उपस्थित सभी लोगों पर छिड़कना चाहिए। इससे आरती की पवित्रता बनी रहती है। इसके अलावे यह आरती देवताओं को बेहद प्रिय है। ऐसा करने से घर के सभी सदस्यों का मन सदैव प्रसन्न रहता है। 

दीप घुमाने की संख्यां 

दीप आरती के दौरान दीप घुमाने के संख्यां खास महत्व रखता है। आरती शुरू करते हुए सबसे पहले पैरों में एक बार घुमाना चाहिए। फिर नाभि के पास दो बार घुमाते हुए मुख मंडल पर एक बार घुमाएं। फिर समस्त अंगों पर कम से कम सात बार घुमाना चाहिए। 

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आरती के पांच अंग 

शास्त्रों में आरती के पांच अंग माने गए हैं। सर्वप्रथम दीपक, दूसरा शुद्ध जल या गंगाजल युक्त शंख की आरती। तीसरा स्वच्छ वस्त्र, चौथा आम या पीपल के पवित्र पत्ते और पांचवा दंडवत प्रणाम करना। इसलिए आरती चाहे प्रात:काल की हो या संध्याकालीन, या फिर किसी विशेष पूजा की आरती हो। उसमें इन पांचों विधियों का क्रमानुसार पालन अवश्य किया जाना चाहिए।

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